गुरु पूर्णिम : गुरु , शिष्य और भक्ति योग लेखक:- डॉo आरo केo यादव प्रार्थना समिति हसनपुर, समस्तीपुर (बिहार)
गुरु ,शिष्य और भक्ति योग लेखक:- डॉo आरo केo यादव प्रार्थना समिति हसनपुर, समस्तीपुर (बिहार) चर्चित इंडिया न्यूज़ (समस्तीपुर ) । कर्म योग, भक्ति योग, राज योग और ज्ञान योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का चार जातिय मार्ग हैं।तरिके अलग हैं परन्तु उद्देश्य एक हीं ईश्वर से मिलना है। इनमें ज्ञान योग ,सर्वोच्च किन्तु कठिनतम है।इसको बुद्धि के द्वारा तो बहुत से लोग ग्रहण कर लेते हैं लेकिन उसकी सिद्धि बहुत कम लोग कर पाते हैं। भक्ति योग अथवा पूजा ,किसी भी रूप में प्रेम मनुष्य के लिए सबसे सरल, सुखद ,स्वाभाविक और सहज मार्ग है। मानव मात्र के हृदय में व्यष्टि रुप से प्रेम मिलन की नैसर्गिक प्रेरणा है। यही वह भू-तल है जिस पर कोई भी सिद्ध सद् गुरु अपने ब्रह्म व्यक्त समष्टि प्रेम का करुणामय स्पर्श और सम्पन्न दृष्टि से शिष्यों में भक्ति का सुत्रपात कर देते हैं। ज्ञान योगी के लिए साधना का मार्ग आंधी में भी दीप जलाए रखने जैसा ...