देश का सातवां ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ जहां एक ही पिंड में विराजमान शिव और शक्ति

देश का सातवां ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ जहां एक ही पिंड में विराजमान शिव और शक्ति

वाराणसी ( चर्चित इंडिया न्यूज़) विजय कुमार चौधरी / उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में बसा है देश का सातवां ज्योतिर्लिंग 'काशी विश्वनाथ' मंदिर, जो भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है। काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर या विश्वनाथ स्थापित है।

इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए भारत और दुनियाभर से लोग आते हैं। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा जाता है कि, यहां दर्शन मात्र से ही आत्मा शुद्ध हो जाती है, जो जीवन में ज्ञान और भक्ति के मार्ग को बेहतर करती है।

हिंदू परंपराओं के मुताबिक, भारत के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद अन्य ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से मिला पुण्य फल काशी विश्वनाथ मंदिर के एक दर्शन मात्र से ही भक्तों को मिल जाता है।

इस मंदिर में आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, गोस्वामी तुलसीदास, महर्षि दयानंद सरस्वती, गुरुनानक और कई आध्यात्मिक व्यक्तित्वों ने दर्शन किए हैं। 

इस मंदिर के दो गुंबदों को सोने से मढ़वाया है, जिसके लिए साल 1839 में पंजाब के केसरी महाराजा रणजीत सिंह ने दान किया था।

काशी 7 पुराने नगरों में शामिल हैं। इन नगरों में अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारिका शामिल हैं। महाभारत में भी काशी का उल्लेख देखने को मिलता है। 11वीं से 15वीं सदी के बीच देशभर के अन्य मंदिरों के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर को भी नुकसान पहुंचाया गया था। बाबा विश्वनाथ का इतिहास हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। कहा जाता है कि, बादशाह अकबर के बाद टोडरमल ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था।
इसके बाद औरंगजेब ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था जिसके कुछ दशकों के बाद इंदौर की रानी राजकुमारी अहिल्या बाई ने इस मंदिर का फिर से जीर्णोद्वार किया था।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दो हिस्से हैं। दाहिने हिस्से में देवी शक्ति विराजमान हैं और बाएं हिस्से में भगवान शिव विराजमान रहते हैं। इसी कारण से एक ही ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति दोनों के दर्शन हो जाते हैं।

काशी विश्वनाथ धाम के बारे में कहा जाता है कि, जिन भी लोगों की मौत काशी में होती है, उन्हें दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता। यहां मरने के बाद व्यक्ति को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी विश्वनाथ के संबंध में कहा जाता है कि, इस नगरी की रक्षा खुद भगवान शिव जी करते हैं। कहते हैं कि, जब कलियुग के आखिर में प्रलय आएगा तब सिर्फ काशी विश्वनाथ ही एकमात्र सुरक्षित रहेगा। 
मंदिर में स्थित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्त को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में काशी के 18 नामों का जिक्र किया गया है। जो नाम इस प्रकार हैं- काशी, वाराणसी, अविमुक्त क्षेत्र, आनंदकानन, महाश्मशान, रुद्रावास, काशिका, तपस्थली, मुक्तिभूमि, शिवपुरी, त्रिपुरारि राज नगरी और विश्वनाथ नगरी।

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