राष्ट्रपति से मेडल के लिए नॉमिनेटेड रेल एसपी बीणा कुमारी की कहानी
'बचपन से पुलिस की वर्दी पहनने का शौक था': बोर्ड एग्जाम में बदलवाया था नाम, प्रेसिडेंट मेडल के लिए नॉमिनेटेड रेल एसपी बीणा कुमारी की कहानी
चर्चित इंडिया न्यूज़ / विजय कुमार चौधरी ( मुजफ्फरपुर ) बीणा कुमारी रेल एसपी मुजफ्फरपुर की रेल एसपी बीणा कुमारी को इस साल राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले जारी सम्मान लिस्ट में उनका नाम शामिल किया गया है। बिहार से इस कैटेगरी में उनके साथ इंस्पेक्टर जनरल (IG) संजय कुमार का नाम भी शामिल है।
करीब 30 साल के पुलिस सेवा काल में बीणा कुमारी ने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नक्सल ऑपरेशन, विशेष शाखा, निगरानी अन्वेषण, कमजोर वर्ग, पुलिस प्रशिक्षण और रेल पुलिस समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
बीणा कुमारी का ससुराल सीवान जिले के बसांव गांव में है। उनके पति प्रमोद राय ERSS यानी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम डायल 112 के डीआईजी हैं।
नाम बदलने की भी कहानी, 10वीं में 'वीणा' से हो गईं 'बीणा'
रेल एसपी बीणा कमारी ने बताया कि बचपन से ही
नाम बदलने की भी कहानी, 10वीं में 'वीणा' से हो गईं 'बीणा'
रेल एसपी बीणा कुमारी ने बताया कि बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी अच्छी थीं और उन्हें गाने का भी शौक था। गायन में रुचि और अच्छी आवाज के कारण माता-पिता ने उनका नाम 'वीणा' रखा था। दसवीं तक स्कूल और अन्य दस्तावेजों में उनका नाम वीणा ही रहा।
लेकिन दसवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान एक शिक्षक ने स्कूल के रजिस्टर में उनका नाम 'बीणा' दर्ज कर दिया। इसके बाद बोर्ड से लेकर आगे की पढ़ाई और नौकरी के सभी दस्तावेजों में यही नाम चलता गया। आज पुलिस सेवा में इसी 'बीणा कुमारी' नाम से पहचान बनाने वाली अधिकारी के नाम की कहानी भी उनके जीवन के सफर का दिलचस्प हिस्सा है।
बीणा कुमारी ने 10वीं तक की पढ़ाई और इसके बाद कॉलेज, ग्रेजुएशन की शिक्षा भी बोकारो से पूरी की। आगे की उच्च शिक्षा उन्होंने जबलपुर से हासिल की।
जेल सर्विस से राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा सफर
साल 1996 में जेल सर्विस से शुरू हुआ उनका करियर 1999 में बिहार पुलिस सेवा, 2019 में भारतीय पुलिस सेवा और अब राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा है।
बीणा कुमारी का जन्म साल 1969 में सारण जिले के गरखा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में हुआ। उनके पिता झारखंड के बोकारो में नौकरी करते थे। ऐसे में उनकी शुरुआती पढ़ाई से लेकर हायर एजुकेशन तक का अधिकांश समय बोकारो में ही बीता।
बीणा कुमारी ने 10वीं तक की पढ़ाई और इसके बाद कॉलेज, ग्रेजुएशन की शिक्षा भी बोकारो से पूरी की। आगे की उच्च शिक्षा उन्होंने जबलपुर से हासिल की।
जेल सर्विस से राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा सफर
साल 1996 में जेल सर्विस से शुरू हुआ उनका करियर 1999 में बिहार पुलिस सेवा, 2019 में भारतीय पुलिस सेवा और अब राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा है।
बीणा कुमारी का जन्म साल 1969 में सारण जिले के गरखा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में हुआ। उनके पिता झारखंड के बोकारो में नौकरी करते थे। ऐसे में उनकी शुरुआती पढ़ाई से लेकर हायर एजुकेशन तक का अधिकांश समय बोकारो में ही बीता।
बीणा कुमारी बताती हैं किश्र उन्हें बचपन से ही वर्दी पहनने का शौक था। इसी लगाव ने उन्हें पुलिस सेवा की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 1996 में उन्होंने जेल सर्विस में प्रोविजन ऑफिसर के रूप में नौकरी शुरू की। इसके बाद बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति मिली।
लंबे सेवाकाल में बेहतर कार्य के लिए बीणा कुमारी को वर्ष 2019 में पुलिस पदक फॉर मेरिटोरियस सर्विस से भी सम्मानित किया जा चुका है।
1999 में बिहार पुलिस सेवा, मुंगेर से शुरू हुआ पुलिसिंग का सफर
फरवरी 1999 में बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति के बाद उन्होंने हजारीबाग पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में करीब एक साल की ट्रेनिंग की। ट्रेनिंग पूरा करने के बाद मुंगेर में रिजिनल ट्रेनिंग हुई और यहीं से उनकी पहली पोस्टिंग हुई।
फरवरी 2002 में हवेली खड़गपुर, मुंगेर की SDPO के रूप में पोस्टिंग हुई। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने नक्सल ऑपरेशन, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान और विधि-व्यवस्था सुधार से जुड़े कार्यों में जिम्मेदारी निभाई।
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