भाजपा एमएलसी देवेश की जगह विधान परिषद में मनोनीत होंगे मंत्री दीपक प्रकाश
भाजपा एमएलसी देवेश की जगह विधान परिषद में मनोनीत होंगे मंत्री दीपक प्रकाश
चर्चित इंडिया न्यूज़ ( पटना ) सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को जीवनदान मिल गया है. सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दीपक प्रकाश के बचाव में उतर आया है. शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह राज्य सरकार मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद के लिए मनोनीत करेगी । शनिवार को राज्य कैबिनेट की आपात बैठक बुलायी गयी है. बैठक में देवेश कुमार की खाली सीट पर दीपक प्रकाश के मनोनयन के लिए कैबिनेट मुख्यमंत्री को अधिकृत कर देगी. इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद के सदस्य मनोनीत किये जाने के लिए राज्यपाल को अनुशंसा करेंगे. राज्यपाल की सहमति के बाद दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बन जायेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने की थी तल्ख टिप्पणी :
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा कि दीपक प्रकाश राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. फिर भी वह छह महीने से ज्यादा समय से अपने पद पर कैसे बने हुए हैं. कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से जवाब मांगा था और सुनवाई की बात कही थी ।
पहली बार एमएलसी >> बने देवेश कुमार ने दिया विधान परिषद से इस्तीफा
आज कैबिनेट की के मनोनयन के लिए
सीएम होंगे अधिकृत
सदन के सदस्य रहे मंत्री दीपक प्रकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने की थी तल्ख टिपणी
किसी सदन के सदस्य बने बिना मंत्री हैं दीपक प्रकाश :
मंत्री दीपक प्रकाश एनडीए के घटक रालोमो के अध्यक्ष सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं ।वह फिलहाल विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. नवंबर, 2025 में नीतीश कुमार की अगुआई में बनी एनडीए सरकार में भी दीपक प्रकाश मंत्री बनाये गये थे. दूसरी बार इस साल 15 अप्रैल को बनी सम्राट चौधरी की सरकार में भी दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है. अभी भी वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं ।
भाजपा का सिपाही हूं पार्टी के निर्देश पर दे दिया इस्तीफा : देवेश
भाजपा ने 2021 में पहली बार :
देवेश कुमार को मनोनयन कोटे से विधान परिषद भेजा था. मार्च, 2027 में उनका कार्यकाल खत्म होने वाला था. देवेश कुमार ने प्रभात खबर को बताया कि पार्टी ने निर्देश दिया और मैंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को सौंप दिया. उन्होंने कहा कि मैं भाजपा का सिपाही हूं. सरकार मंत्री दीपक प्रकाश के मामले में कोर्ट की टिप्पणी झेल रही थी।
क्या है नियम : किसी भी व्यक्ति को बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है, लेकिन उसे छह माह के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है ।
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