हसनपुर : श्रीमद् भागवत महापुराण भगवान का हीं स्वरूप:-पडिंत श्री राज कुमार मिश्र
श्रीमद् भागवत महापुराण भगवान का हीं स्वरूप:-पडिंत श्री राज कुमार मिश्र
विजय कुमार चौधरी/ समस्तीपुर समस्तीपुर ( हसनपुर ) श्री मदभागवताख्योयम प्रत्यक्षः कृष्ण मेव ही, श्री मदभागवत महा पुराण स्वयं भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप है क्योंकि जिस समय भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला को संपन्न करके 125 वर्ष के पश्चात गोलोकधाम जाने लगे उस समय भगवान के मित्र और देवगुरु वृहस्पति के शिष्य उद्धव जी ने भगवान से कहा कि आपके जाने के बाद हम संसारी लोग अपना दुख सुख लेकर किसके पास जायेंगे, श्री कृष्ण कहा की उद्धव जी एक बात अपने दिमाग मे हमेसा के लिए बैठा लो की मेरा कहीं आना जाना नही होता है । मै दिखने लगता हूँ तो लोग कहते हैं आ गये ,नही दिखता हूँ तो लोग कहते हैं चले गए ।वास्तव में मै हमेसा सर्वत्र विद्यमान रहता हूँ, लेकिन तुम्हारे संतुष्टि के लिए मै आज अपना एक रूप श्री मदभागवत महापुराण मे स्थापित कर रहा हूँ। उसी समय श्री कृष्ण से एक ज्योति निकलती है जो कि उद्धव जी के देखते देखते भागवत जी मे समाहित हो जाती है, जिसका प्रमाण ये श्लोक है, स्वकीयम यद् भवेत्तेजः तच्च भागवते दधात। तिरोधाय प्रविष्टोयम श्री मदभागवतार्वनम।। इसलिए श्री भागवत भगवान जी का स्वरूप माना गया है राधे राधे ।
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