अभावों से लड़कर , संघर्षों से निखर कर बनी गयी कला की दुलारी ' दुलारी देवी '
अभावों से लड़ कर , संघर्षों से निखर कर बनी गयी कला की दुलारी ' दुलारी देवी '
एक फरवरी को जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करने पहुंची तो अचानक से बिहार के सुप्रसिद्ध कलाकार दुलारी देवी चर्चा में आ गयी। वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के लिए क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी जिसके किनारे पर गोल्डन वर्क था। यही साड़ी पहाश्री दुलारी देवी ने उन्हें उपहार में दिया था । दुलारी देवी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है ,जो हर किसी को प्रेरित और अचंभित करता है।
चर्चित इंडिया न्यूज़ / विजय कुमार चौधरी ( समस्तीपुर) बिहार की उर्वर भूमि से सदियों से कला ,संस्कृति और ज्ञान के क्षेत्र में अनगिनत विभूतियों को जन्म दिया है। जिन्होंने अपनी प्रतिभा से देश विदेश में पहचान बनायी । ऐसी ही एक प्रेरक शख्सियत हैं पहाश्री से सम्मानित दुलारी देवी जिनकी कहानी संघर्ष संकल्प और अपार मेहनत का प्रतीक है। मधुबनी जिला के रांटी गांव में 27 दिसंबर 1967 को जन्मी दुलारी देवी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा । मछुआरा परिवार में जन्म लेने के कारण आर्थिक तंगी और शिक्षा और सामाजिक बेड़ियों से उन्हें जकड़ लिया ,लेकिन उन्होंने इन बधाओ को पार कर अपनी एक अलग पहचान बनाई । दुलारी देवी का बचपन बेहद गरीबी और कठिनाइयों के बीच बीता, साथीही कम उम्र में विवाह और पारिवारिक जीवन के तनाव ने संघर्ष को और गहरा कर दिया। पति के ताने से तंग आकर घर छोड़ना आसान नहीं था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी वर्षों तक दूसरों के घरों में झाड़ू , पोछा का काम करते हुए गांव की मधुबनी पेंटिंग की कलाकारी कर्पूरी देवी के जरिए हुए इस कला से वे परिचित हुए इसके बाद उनकी अभिरुचि इसमें हुई और जीवन को नया आयाम मिला । बिहार की इस प्राचीन लोककला ने उन्होंने न केवल रोजगार दिया बल्कि वैश्विक पहचान भी दिलायी । दुलारी देवी ने इस कला को न सिर्फ अपनाया बल्कि उसमें नित नये प्रयोग कर अपनी विशिष्ट शैली विकसित की ।
ग्रामीण जीवन के यथार्थ को चित्रित किया। :
मिथिला पेंटिंग में उनकी खास पहचान है। ' कचनी ' शैली, यानी रेखा चित्रण है, परंपरागत मिथिला के चित्रकला जहां देवी देवताओं और पौराणिक कथाओं पर केंद्रित रहती है, वहीं दुलारी देवीने ग्रामीण जीवन के यथार्थ को अपनी कला में जगह दी । उनकी पेंटिंग्स में मछुआरों, किसानों, पशु पक्षियों और प्राकृतिक परिवेश के दृश्य प्रमुखता से उभरता हैं इनके जरिये वे न केवल सौंदर्य बोध प्रस्तुत करती है बल्कि सामाजिक और किसने और पशुओं और प्राकृतिक परिवेश के दृश्य प्रमुखता से उभरते है। बल्कि समाज और पर्यावरण मुद्दों पर भी ध्यान आकृष्ट करती है। यही कारण है कि उनकी कृतियों से में रंगों की खूबसूरती के साथ जीवन के संघर्ष और प्रकृति के महत्व की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। दुलारी देवी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी लगन और विश्वास आत्मविश्वास से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। उनकी कला और संघर्ष को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। प्राह्श्री सम्मान उनके अद्वितीय योगदान का प्रमाण है। हाल ही में केंद्रीय बजट 2025 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण में उनकी बनाई मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहन कर इस लोक कला को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया। वित्त मंत्री द्वारा पहनी गई साड़ी जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, न केवल लोककलाओं को सम्मानित किया । बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई । 1 फरवरी को जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में देश संस्कृति को अचानक बिहार के सुप्रसिद्ध कलाकारी जूली देवी चर्चा में आ गई वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के लिए क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी जिसके किनारे पर गोल्डन वर्क था यही सारी पे श्री दुलारी देवी ने उन्हें उपहार में दिया था दुलारी देवी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा जो हर किसी को प्रेरित औरअचंभित करता है।
लोक कथाओं का अनूठा समावेश : मिथिला पेंटिंग के जरिए दुलारी देवी इस लोककला के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उनके पेंटिंग्स में प्राकृति ,ग्रामीण जीवन और लोक कथाओं का अनूठा समावेश है। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में भी उनकी कला ने जागरूकता फैलाने में मदद की है। बिहार में जल - जंगल - ज़मीन से जुड़ी लड़ाइयां और पर्यावरणीय संकटों के बीच उनकी पेंटिंग्स ने पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र के महत्व को रेखांकित किया है। उनके चित्रों में पेड़ पौधे न केवल धार्मिक प्रतीकों के रूप में देखते हैं बल्कि प्राकृतिक संरक्षण संदेशवाहक भी बनते हैं। दुलारी देवी का जीवन दर्शाता है कि जब कोई व्यक्ति अपने डर असफलता और सीमाओं को पार करता है तो वह न केवल अपने जीवन को बदलता है बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। सच ही कहा गया है कि वह दुख महान होता है , जो एक महान सुख को जन्म देता देता है , और दुलारी देवी का जीवन इसी विचार का संजीव उदाहरण है।
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